Mahesh Pareek

I am sharing My and other People’s thought.

व्यवस्था परिवर्तन के लिए बने संविधान

Posted by maheshpareek on जनवरी 27, 2012

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प्यार अंधा होता है

Posted by maheshpareek on सितम्बर 16, 2011

प्यार अंधा होता है-यह मात्र एक कहावत ही नहीं है.वैज्ञानिकों ने वे तथ्य जुटा लिए हैं जो यह बात साबित करते हैं.

एक अध्ययन से पता चला है कि प्रेम होने पर दिमाग़ में कुछ उन गतिविधियों पर अंकुश लग जाता है जो किसी को आलोचनात्मक नज़र से देखती हैं.

उस व्यक्ति के क़रीब होने पर दिमाग़ ख़ुद बख़ुद यह तय करने लगता है कि उसके चरित्र और व्यक्तित्व का कैसे आकलन किया जाए.

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ लंदन का यह अध्ययन न्यूरोइमेज पत्रिका में छपा है.
माँ की ममता

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि दिमाग़ पर इस तरह का असर रोमांस के दौरान भी होता है और ममता के तहत भी.

माँ की ममता भी बच्चे की अच्छाइयाँ ही देख पाती है

यानी माँ का बच्चे से लगाव भी कुछ इसी तरह का प्रभाव पैदा कर देता है.

उस समय नकारात्मक भावनाएँ कहीं गहरे दब जाती हैं.

शोधकर्ताओं के दल ने 20 युवा माँओं के दिमाग़ का उस समय अध्ययन किया जब उन्हें उनके अपने बच्चों और उनके परिचितों के बच्चों के चित्र दिखाए गए.

उन्होंने पाया कि उस समय मस्तिष्क की गतिविधियाँ कुछ ऐसी ही थीं जैसी रोमांटिक युगल की होती हैं.

दोनों अध्ययनों से पता चला कि उस समय दिमाग़ की कुछ ऐसी ही स्थिति होती है जैसी अचानक धन मिल जाने या अच्छा खाने-पीने के समय होती है.

इसी तरह के परिणाम जानवरों में भी देखने में आए.

लेकिन अनुसंधान से यह भी पता चला कि रोमांटिक और ममता से जुड़ी भावनाओं में एक बुनियादी फ़र्क़ है.

प्रेमी-प्रेमिका के दिमाग़ के उस हिस्से में भी गतिविधियाँ तेज़ हो जाती हैं जो सेक्स उत्तेजना से संबद्ध हैं.

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What happens when you have too much debt? – The Daily Reckoning by Bill Bonner

Posted by maheshpareek on सितम्बर 12, 2011

What happens when you have too much debt? – The Daily Reckoning by Bill Bonner.

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Big commodity uptrend that is COAL

Posted by maheshpareek on सितम्बर 5, 2011

big commodity uptrend that isn’t getting nearly as much attention…

It’s the big uptrend in the price of coal.

As I’ll show you today, despite all the bad press coal gets, it’s in a major uptrend… and I expect it will be for at least the next decade…

Coal today is largely a story about electricity use… And the world consumes staggering amounts of power. Electricity is a fundamental fact of modern life. It powers virtually everything we do — from heating the stoves that cook our dinner and lighting up the TVs we watch, to powering the massive factories that build cars and refine natural resources.

And as countries like China and India (aka “Chindia”) modernize their economies, the volume of electricity they devour is mind-boggling.

In the U.S. alone, we use almost 4 trillion kilowatt-hours of electricity every year, an amount the U.S. Energy Information Administration (EIA) says is growing about 1% a year.

Now, consider China. Power consumption there grew from 1.2 trillion kilowatt-hours in 2000 to about 4.5 trillion kilowatt-hours this year. That’s a 275% increase in 11 years. India’s consumption has grown from 375 billion kilowatt-hours in 2000 to more than 600 billion kilowatt-hours today. And 80% of that electricity is created by coal.

This table below, using numbers from the International Energy Agency, shows how “Chindia’s” coal consumption is growing:

Environmentalists would like to change coal’s vital role. Burning coal for power generation creates more pollutants than other fuels, like uranium and natural gas.

But relatively poor economies like India and China are more concerned with the cheapest, most plentiful sources of power right now. They’ll worry about cleanliness later. As long as coal is cheap and plentiful, it will serve as a cornerstone of the world’s power industry.

This next charts shows that the U.S. Energy Information Agency agrees with me. You’ll note how coal is expected to play a huge role in power generation for decades:

In addition to Chindia’s coal consumption, Japan’s tsunami tragedy is a tailwind for prices. Japan and many other nations will be forced to burn coal if they want use less nuclear power (which is a big topic I’ll cover another time).

But as I hinted at the beginning of this essay, the big thing to keep in mind here is the BIG TREND.

Below is the trend in coal prices since 2002. When you slice out the crazy credit crisis action 2008, coal sports a solid uptrend that has lasted for years.

When I consider the bright economic future of massive countries like China and India (which collectively hold nearly 10 times the population of the U.S.), the world’s recent aversion toward nuclear power, and the black stuff’s big uptrend, I end up with just one piece of advice:

Get long coal, and stay that way for a long time.

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इस थाली में छुपे हैं तंदुरुस्ती के सबसे गहरे राज!

Posted by maheshpareek on अगस्त 3, 2011

आगे बढऩे की चाहत और ज्यादा से ज्यादा भौतिक उन्नति की लालसा ने 21 वी सदी के मनुष्य की सेहत को बुरी तरह से प्रभावित किया है। ऐसे में बुजुर्गों की उस कहावत की याद ताजा हो जाती है कि अच्छी सेहत हजार नियामतों से बढ़कर होती है। चांद-तारों तक पहुंच चुकी वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद आधुनिक इंसान पूर्ण स्वास्थ्य के मकसद को हांसिल नहीं कर पाया है।

चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी तेजी से प्रगति हुई है लेकिन दुर्भाग्य कहें या कड़वा सच, सच यह है कि बीमारियों की संख्या और गंभीरता में और भी ज्यादा तेजी से प्रगति हुई है। ये बातें न तो निराश होने के लिये हैं और न ही व्यर्थ की हैं।

यह हकीकत हमें गंभीरता से सोचने और कुछ कारगर उपाय खोजने के लिये प्रेरित करती है। आइये जानते हैं कि बगैर दवाईयों पर डिपेंड हुए तथा बिना डॉक्टरों के चक्कर काटे ही हम अपने भोजन में आवश्यक सुधार करके किस तरह से सदा तंदुरुस्त, उत्साहित और तरोताजा रह सकते हैं। जिस थाली में आप भोजन करने बैठें उसमें नीचे दी बेहद महत्वपूर्ण बातों का बारीकी से ध्यान दें….

- थाली में रखी भोजन सामग्री में कोई भी विजातीय सामग्री शामिल न हो यानी विरोधी प्रकृति के पदार्थ एक साथ न खाएं। जैसे- दूध के साथ दही, खीर या दूध के साथ अधिक चिकनाई वाले पदार्थ, दूध या दूध से बनी मिठाइयों के साथ बेंगन व मूली की शब्जी, गर्म प्रकृति की सामग्री के साथ शीत प्रकृति के पदार्थ…. आदि विरोधी पदार्थों को साथ में न खाएं।

- ध्यान रहे कि आपकी थाली में शरीर के लिये आवश्यक सभी पोषक तत्व शामिल हें या नहीं। प्रतिदिन के भोजन में पर्याप्त विटामिन्स, वसा, खनिज तत्व, प्रोटीन्स, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर्स… आदि बेहद अनिवार्य तत्व अवश्य शामिल हों।

- मेदे से बने, बासी, अधिक जले-भुने, बेहद ऑइली तथा अन्य सभी तामसिक पदार्थों को हर हाल में अपनी थाली से दूर रखें।

- भोजन में शीजनल फल, और सलाद का होना बेहद-बेहद आवश्यक होता है।

- भोजन करने के तत्काल पहले और फौरन बाद में ज्यादा पानी कतई न पीएं, भोजन करने के बीच में वो भी बहुत थोड़ी मात्रा में पानी पीया जा सकता है।

- भोजन भूख से थोड़ी कम मात्रा में ही ग्रहण करें। आपका पेट 50 प्रतिशत खाने से 25 प्रतिशत पानी से और शेष 25 प्रतिशत हवा के लिये खाली होना चाहिये तभी भोजन का पूरा रस बनेगा और आपका शरीर विकसित तथा ऊर्जा से भरपूर होगा।

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7 दिन का प्रयोग स्वभाव में लाएगा पॉजीटिव चेंज

Posted by maheshpareek on अगस्त 3, 2011

आज प्रतिस्पर्धा का युग है। ऐसे में सभी को जरूरत से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है है। शारीरिक और मानसिक श्रम की अधिकता से अधिकांश लोगों का स्वभाव क्रोधी और चिड़चिड़ेपन वाला हो जाता है। किसी का भी छोटी-छोटी बातों में चिड़ जाना आज आम बात हो गई है परंतु जो व्यक्ति प्रतिदिन योग करते हैं वे क्रोध से दूर ही रहते हैं। सर्वांगासन के नियमित अभ्यास से हमारा मन शांत रहता है। जिससे क्रोध तथा चिड़चिड़ेपन से निजात मिलती है। सर्वांगासन शरीर की ऐसी सूक्ष्म ग्रंथियों और मर्म स्थानों को प्रभावित करता है जिससे क्रोध को बढ़ाने वाले आवेश का धीरे-धीरे शमन हो जाता है।

आसन की विधि:

समतल भूमि पर आसन बिछाकर शवासन में लेट जाइएं। अपने दोनों हाथों को जांघों की बगल में तथा हथेलियों को जमीन पर रखें। पैरों को घुटनों से मोड़कर ऊपर उठाएं तथा पीठ को कधों तक उठाएं। दोनों हाथ कमर के नीचे रखकर शरीर के उठे हुए भाग को सहारा दीजिए। इस तरह ठुड्डी को छाती से लगाए रखें। अब सांस को रोके नहीं स्वाभाविक रुप से चलने दें। पैर और धड़ को एक सीध में रखें। इस स्थिति में रुकने के बाद, पैरों को जमीन पर वापस लाइएं। पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए घुटनों को माथे के पास लाइए। हाथों को जमीन पर रखते हुए शरीर और पैरों को धीरे -धीरे वापस शवासन में लाएं अब शवासन में शरीर को शिथिल अवस्था में लाइएं। आसन करते समय आंखों को खुला रखें।

सावधानियां:

आसन का अभ्यास करते समय धैर्य से काम लें। जल्दबाजी एवं हड़बड़ाहट में आसन न करें। इस आसन का अभ्यास पीठ दर्द, कमर दर्द, नेत्र रोगी और उच्च रक्तचाप के रोगी ने करें।

लाभ:

इस आसन के नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव, निराशा, हताशा एवं चिंताएं आदि रोगों का नाश होता है। इससे आखों का तेज बढ़ता है और चेहरा कांतिमय बनता है। स्त्रियों के स्वास्थ में इस आसन से विशेष लाभ होता है । स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। सर्वांगासन से शरीर के उन अंगों से रक्त संचरण बढ़ जाता है, जहां रक्त संचार कम होता है चेहरे पर झाइयां नहीं पड़ती हैं।

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20 मिनट के मजेदार प्रयोग से बीमारियां होंगी नौ दो ग्यारह

Posted by maheshpareek on अगस्त 3, 2011

आज की इस तनाव व भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग स्वस्थ और सुन्दर तरिके से जीना ही भूलते जा रहे हैं। कुछ बातें हैं यदि आप उनका ख्याल रखेंगे तो जिंदगी को ज्यादा स्वस्थ व सुंदर तरीके से जी पाएंगे। खुद को स्वस्थ रखना बहुत जरुरी है। और सबसे महत्वपूर्ण और कीमती बात तो यह है कि खुद को स्वस्थ रखना सिर्फ एक मात्र स्वयं के ही हाथों में है।

जिंदगी इश्वर का दिया हुआ बेहद अनुपम उपहार है। बेहद जरूरी है कि मन और शरीर के लिए कुछ वक्त निकाला जाए। जवानी में संभल गए तो ठीक वरना तो डॉक्टरों और दवाइयों भरोसे ही जिंदगी समझो। यहां हम एक ऐसा दिलस्प और 100 फीसदी अचूक प्रयोग दे रहे हैं, जिसे आप जानते हुए भी अभी तक लाभ नहीं उठा पाए हैं…

सब रोगों की एक दवाई है खुलकर हंसना। दिन की शुरुआत में सिर्फ 20 मिनट तक हंसने से आप तरोताजा एंव उर्जा से भरपूर रहेंगे। हंसने से आपका स्वास्थ्य तो सुधरता ही है साथ ही आत्मविश्वास भी बढ़ता है। हंसने से आश्चर्यजनक रूप से कई सारी गंभीर बीमारियों का सफाया होता है। हंसना हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को काफी बढ़ा देता है। इससे मन प्रसन्न रहता है तथा काम करने में मन लगने लगता है।

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7 दिन का प्रयोग स्वभाव में लाएगा पॉजीटिव चेंज

Posted by maheshpareek on अगस्त 3, 2011

आज प्रतिस्पर्धा का युग है। ऐसे में सभी को जरूरत से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है है। शारीरिक और मानसिक श्रम की अधिकता से अधिकांश लोगों का स्वभाव क्रोधी और चिड़चिड़ेपन वाला हो जाता है। किसी का भी छोटी-छोटी बातों में चिड़ जाना आज आम बात हो गई है परंतु जो व्यक्ति प्रतिदिन योग करते हैं वे क्रोध से दूर ही रहते हैं। सर्वांगासन के नियमित अभ्यास से हमारा मन शांत रहता है। जिससे क्रोध तथा चिड़चिड़ेपन से निजात मिलती है। सर्वांगासन शरीर की ऐसी सूक्ष्म ग्रंथियों और मर्म स्थानों को प्रभावित करता है जिससे क्रोध को बढ़ाने वाले आवेश का धीरे-धीरे शमन हो जाता है।

आसन की विधि:

समतल भूमि पर आसन बिछाकर शवासन में लेट जाइएं। अपने दोनों हाथों को जांघों की बगल में तथा हथेलियों को जमीन पर रखें। पैरों को घुटनों से मोड़कर ऊपर उठाएं तथा पीठ को कधों तक उठाएं। दोनों हाथ कमर के नीचे रखकर शरीर के उठे हुए भाग को सहारा दीजिए। इस तरह ठुड्डी को छाती से लगाए रखें। अब सांस को रोके नहीं स्वाभाविक रुप से चलने दें। पैर और धड़ को एक सीध में रखें। इस स्थिति में रुकने के बाद, पैरों को जमीन पर वापस लाइएं। पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए घुटनों को माथे के पास लाइए। हाथों को जमीन पर रखते हुए शरीर और पैरों को धीरे -धीरे वापस शवासन में लाएं अब शवासन में शरीर को शिथिल अवस्था में लाइएं। आसन करते समय आंखों को खुला रखें।

सावधानियां:

आसन का अभ्यास करते समय धैर्य से काम लें। जल्दबाजी एवं हड़बड़ाहट में आसन न करें। इस आसन का अभ्यास पीठ दर्द, कमर दर्द, नेत्र रोगी और उच्च रक्तचाप के रोगी ने करें।

लाभ:

इस आसन के नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव, निराशा, हताशा एवं चिंताएं आदि रोगों का नाश होता है। इससे आखों का तेज बढ़ता है और चेहरा कांतिमय बनता है। स्त्रियों के स्वास्थ में इस आसन से विशेष लाभ होता है । स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। सर्वांगासन से शरीर के उन अंगों से रक्त संचरण बढ़ जाता है, जहां रक्त संचार कम होता है चेहरे पर झाइयां नहीं पड़ती हैं।

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जानिये दिमाग क्या याद रखता है और क्या भूल जाता है?

Posted by maheshpareek on अगस्त 3, 2011

भागदोड़ और बेहद व्यस्तताओं से भरी हुई आधुनिक जीवनशैली ने इंसान को शारीरिक रूप से ही नहीं, मन-मस्तिष्क के स्तर पर भी अस्त-व्यस्त कर दिया है। वैसे भी मशीनी युग में इंसान के अधिकांश शारीरिक और मानसिक कामों को आधुनिक मशीनों द्वारा किया जाने लगा है। इस अति मशीनीकरण ने जिंदगी को ज्यादा सुविधाजनक तो बना दिया है, पर साथ ही इसका सबसे बुरा असर यह हुआ है कि इससे मनुष्य की शारीरिक और मानसिक क्षमता में काफी गिरावट भी आ गई है।

कमजोर स्मरण शक्ति यानी यादाश्त की कमी की समस्या आज लगभग आम हो चुकी है। कमजोर स्मरण शक्ति के कारण व्यक्ति भूलने की आदत का शिकार हो जाता है। इस समस्या का प्रमुख कारण काम का तनाव, अधिक व्यस्तता और अनियमित दिनचर्या का होना है।

सभी चिकित्सा पद्धतियों में स्मरण शक्ति बढ़ाने के कई उपाय और औषधियां बताई गईं हैं, लेकिन ये दवाइयां कुछ समय के लिये असर दिखाकर फिर से निष्क्रीय हो जाती हैं। इसलिये यदि कोई भूलने की इस जटिल समस्या का स्थाई समाधान चाहता हो तो उसे योग में बताए गए इस उपाय को अवश्य आजमाना चाहिये..

100 फीसदी कारगर प्रयोग:

- उगते हुए सूरज की ओर मुखातिब होकर आंखें बंद करके ध्यान मुद्रा में बैठें। अब मन में लगातार उठते हुए विचारों को

आते हुए देेखें। योग में इसे ही साक्षी साधना भी कहा जाता है। इस अभ्यास को लगातार 15 दिनों तक करने से आपका

मन एकाग्र होने लगेगा।

- यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि इंसान को वही बात या घटना लंबे समय तक याद रहती है जिसमें उसका मन अधिक से

अधिक एकाग्र होता है। अत: जो भी करें उस समय दूसरा कुछ भी नहीं सोचें हर समय पूरी तरह से वर्तमान में जीना सीखें। – काम करते समय पिछली घटनाओं और भविष्य की चिंता से बिल्कुल दूर रहें। जो करें बस पूरी तरह से मन-मस्तिष्क से

वहीं उपस्थित रहें। आप देखेंगे कि कुछ ही समय में आपकी भूलने की आदत बगैर किस दवाई के ही हमेशा के लिये मिट

चुकी है।

योगिक उपचार:

- योग और आसन-प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

- सुबह की ताजी हवा में घूमें या धीमी गति से दोड़ लगाएं।

- हमेशा लंबी और गहरी सांस लें ताकि आपके शरीर और दिमाग को अधिक से अधिक आक्सीजन मिल सके

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अमीर, प्रसिद्ध और ताकतवर बना सकते हैं धर्म के ये-18 सूत्र

Posted by maheshpareek on अगस्त 3, 2011

अमीर, प्रसिद्ध और ताकतवर बना सकते हैं धर्म के ये-18 सूत्र

जीवन को सम्पूर्ण रूप से सुखमय बनाने का उन्नत ज्ञान संजो रखा है हमारे शास्त्रों ने। ऐसा ही एक ग्रंथ है- महाभारत। महाभारत से हमें आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ शरीर-स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के 100 फीसदी प्रामाणिक सूत्र प्राप्त होते हैं। अच्छे स्वास्थ्य के साथ-साथ धन-सम्पत्ति और शांति को हांसिल करने के लिये आइये जानते हैं महाभारत के कुछ अनमोल सूत्र… सदाचार से मनुष्य को उत्तम स्वास्थ्य, लंबी आयु, लक्ष्मी तथा इस लोक और परलोक में कीर्ति की प्राप्ति होती है।

1. दुराचारी मनुष्य इस संसार में लम्बी आयु नहीं पाता, अत: मनुष्य यदि अपना कल्याण करना चाहता हो तो सदाचार के द्वारा अपनी बुरी प्रवृत्तियों का त्याग कर देना चाहिये।

2. सदाचार धर्मनिष्ठ तथा सच्चरित्र पुरुषों का लक्षण है। सदाचार ही कल्याण का जनक और कीर्ति को बढ़ाने वाला है, इसी से आयु की वृद्धि होती है और यही बुरे लक्षणों का नाश करता है।

3. सम्पूर्ण आगमों में सदाचार ही श्रेष्ठ बतलाया गया है। सदाचार से धर्म उत्पन्न होता है और धर्म के प्रभाव से आयु की वृद्धि होती है।

4. जो मनुष्य धर्म का आचरण करते हैं और समाज की भलाई के कार्यों में लगे रहते हैं, उनके दर्शन न हुए हों तो भी केवल नाम सुनकर मानव-समुदाय उनमें प्रेम करने लगता है।

5. जो मनुष्य नास्तिक, क्रियाहीन, गुरु और शास्त्र की आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, धर्म को न जानने वाले, दुराचारी, शीलहीन, धर्म की मर्यादा को भंग करने वाले तथा दूसरे वर्ण की स्त्रियों से संपर्क रखने वाले हैं, वे इस लोक में अल्पायु होते हैं और मरने के बाद नरक में पड़ते हैं।

6. जो सदैव अशुद्ध व चंचल रहता है, नाखुन चबाता है, उसे दीर्घायु नहीं प्राप्त होती।

7. ईष्र्या करने से, सूर्योदय के समय और दिन में सोने से आयु क्षीण होती है।

8. जो सदाचारी, श्रद्धालु, ईष्र्यारहित, क्रोधहीन, सत्यवादी, हिंसा न करने वाला, दोषदृष्टि से रहित और कपटशून्य है, उसे दीर्घायु प्राप्त होती है।

9. प्रतिदिन सूर्योदय से एक घंटा पहले जागकर धर्म और अर्थ के विषय में विचार करें।

10. हमेशा मौन रहकर ही दांतों की सफाई करें। दंतधावन किये बिना देव पूजा व संध्या न करें।

11. देवपूजा व संध्या किये बिना गुरु, वृद्ध, धार्मिक, विद्वान पुरुष को छोड़कर दूसरे किसी के पास न जाय।

12. सुबह सोकर उठने के बाद पहले माता-पिता, आचार्य तथा गुरुजनों को प्रणाम करना चाहिए।

13. सूर्योदय होने तक कभी न सोये, यदि किसी दिन ऐसा हो जाय तो प्रायश्चित करे, गायत्री मंत्र का जप करे, उपवास करे या फ लादि पर ही रहे।

14. स्नानादि से निवृत्त होकर प्रात:कालीन संध्या करे। जो प्रात:काल की संध्या करके सूर्य के सम्मुख खड़ा होता है, उसे समस्त तीर्थों में स्नान का फल मिलता है और वह सब पापों से छुटकारा पा जाता है।

15. सूर्योदय के समय ताँबे के लोटे में सूर्य भगवान को जल(अघ्र्य) देना चाहिए। इस समय आँखें बन्द करके भ्रू-मध्य में सूर्य की भावना करनी चाहिए।

16. सूर्यास्त के समय भी मौन होकर संध्योपासना करनी चाहिए। संध्योपासना के अंतर्गत शुद्ध व स्वच्छ वातावरण में प्राणायाम व जप किये जातेहैं।

17. नियमित त्रिकाल संध्या करने वाले को रोजी रोटी के लिए कभी हाथ नहीं फैलाना पड़ता ऐसा शास्त्र वचन है। ऋषिलोग प्रतिदिन संध्योपासना से ही दीर्घजीवी हुए हैं।

18. बुजुर्ग व्यक्तियों के आने पर बच्चों, किशोरों और युवाओं के प्राण ऊपर की ओर उठने लगते हैं। ऐसी दशा में वह खड़ा होकर स्वागत और प्रणाम करता है तो वे प्राण पुन: पूर्वावस्था में आ जाते हैं।

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