Mahesh Pareek

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क्या है रेपो, रिवर्स रेपो और सीआरआर

Posted by maheshpareek on सितम्बर 22, 2008

रेपो दर

बैंकों को अपने दैनिक कामकाज के लिए प्राय: ऐसी बड़ी रकम की जरूरत होती है जिनकी मियाद एक दिन से ज्यादा नहीं होती। इसके लिए बैंक जो विकल्प अपनाते हैं, उनमें सबसे सामान्य है केंद्रीय बैंक (भारत में रिजर्व बैंक) से रात भर के लिए (ओवरनाइट) कर्ज लेना। इस कर्ज पर रिजर्व बैंक को उन्हें जो ब्याज देना पड़ता है, उसे ही रेपो दर कहते हैं।

रेपो दर में बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह होता है कि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से रात भर के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। साफ है कि बैंक दूसरों को कर्ज देने के लिए जो ब्याज दर तय करते हैं, वह भी उन्हें बढ़ाना होगा। इसके उलट रेपो रेट कम होने से बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा और इसलिए बैंक ब्याज दरों में कमी करेंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा रकम कर्ज के तौर पर दी जा सके।

रिवर्स रेपो दर

नाम के ही मुताबिक रिवर्स रेपो दर ऊपर बताए गए रेपो दर से उलटा होता है। बैंकों के पास दिन भर के कामकाज के बाद बहुत बार एक बड़ी रकम शेष बच जाती है। बैंक वह रकम अपने पास रखने के बजाय रिजर्व बैंक में रख सकते हैं, जिस पर उन्हें रिजर्व बैंक से ब्याज भी मिलता है। जिस दर पर यह ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं।

अगर रिजर्व बैंक को लगता है कि बाजार में बहुत ज्यादा तरलता (लिक्विडिटी) है, तो वह रिवर्स रेपो दर में बढ़ोतरी कर देता है, जिससे बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपना धन रिजर्व बैंक के पास रखने को प्रोत्साहित होते हैं और इस तरह उनके पास बाजार में छोड़ने के लिए कम धन बचता है।

नकद आरक्षी अनुपात

सभी बैंकों के लिए जरूरी होता है कि वह अपने कुल कैश रिजर्व का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास जमा रखें। इसे नकद आरक्षी अनुपात कहते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि अगर किसी भी मौके पर एक साथ बहुत बड़ी संख्या में जमाकर्ता अपना पैसा निकालने आ जाएं तो बैंक डिफॉल्ट न कर सके।

आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बिना जब बाजार से तरलता कम करना चाहता है, तो वह सीआरआर बढ़ा देता है। मंगलवार को मौद्रिक नीति की सालाना समीक्षा के बाद सीआरआर 8.25 फीसदी हो गया है, यानी बैंकों को अब अपने 100 रुपए के कैश रिजर्व पर 8.25 रुपए का रिजर्व रखना होगा। इससे बैंकों के पास बाजार में कर्ज देने के लिए कम रकम बचेगी, लेकिन रेपो और रिवर्स रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने से कॉस्ट ऑफ फंड पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रेपो और रिवर्स रेपो दरें रिजर्व बैंक के हाथ में तरलता को तुरंत प्रभावित करने वाले हथियार माने जाते हैं, जबकि सीआरआर से तरलता पर तुलनात्मक तौर पर ज्यादा समय में असर पड़ता है।

One Response to “क्या है रेपो, रिवर्स रेपो और सीआरआर”

  1. योगेन्द्र said

    शब्दकोश में repo = An item that has been repossessed दिया है । क्या रैपो वही शब्द है या कोई और जैसे संक्षिप्त हो किसी वाक्यांश (phrase) का ।
    - योगेन्द्र जोशी (indiaversusbharat.wordpress.com; hinditathaakuchhaur.wordpress.com;
    jindageebasyaheehai.wordpress.com; vichaarsankalan.wordpress.com)

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